आजाद हिन्द फौज के सिपाही का परिवार लड़ रहा गरीबी से: आमदनी के नाम पर सिर्फ 3 हजार की पेंशन
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज जयंती है। उनकी आजाद हिन्द फौज के सिपाही रहे खितिज चंद्र रॉय दस हुगली के श्रीरामपुर में रहते थे। अंग्रेजो से सीधा मुकाबला और ढाका की बदनाम जेल में 18 महीने जुल्म सहने वाले खितिज चंद्र का परिवार एक कच्चे माकन में गरीबी से लड़ रहा है।
अपनी को मां को छोड़ रॉय आजादी के लिए निकल गए और अब उनके परिवार को देखने वाला कोई नहीं है। यह परिवार दो कमरे के बांस और टाली के मकान में राज्य सरकार से मिल रही 3,000 रुपए महीने की पेंशन से गुजारा कर रहा है। परिवार में खितिज चंद्र रॉय की पत्नी और दो बेटे हैं। उन्होंने मदद के लिए खत भी लिखा लेकिन कुछ नहीं बदला।
अपने वक्त में खितिज चंद्र रॉय कई क्रांतिकारियों के करीब थे। उनके घर 1978 में अंग्रेजी सरकार को सीधी चुनौती देने वाले नायक गणेश घोष का आना-जाना था। उनके साथी राजनीति में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाले जयप्रकाश नारायण, सुभाष चंद्र बोस, शरत चंद्र बोस और अमियो बोस थे।
1942 में 18 महीने ढाका के चट्टग्राम जेल में खितिज चंद्र नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ कैद रहे। अंग्रेजी सैनिकों की आँखों में धूल झोंककर 18 महीने बाद जेल से फरार हो गए। उन्हें 1946 में कोटकाता से दोबारा गिरफ्तार कर अलीपुर सेंट्रल जेल में डाल दिया।
खितिज चंद्र रॉय के घर आमदनी के नाम पर सरकारी पेंशन आती है। यह हर महीने 3 हजार रुपए की पेंशन पश्चिम बंगाल सरकार देती है। जिसमे गुजारा करना नामुमकिन है। उनकी पत्नी झरना रॉय बताया कि बेटे अभिजीत ने सरकार से कई बार मदद की गुजारिश कर चुके है पर किसी तरह की मदद नहीं मिली।
अभिजीत रॉय ने बताया कि उनके पिता का जन्म 1920 में हुआ और उन्होंने खुद को कम उम्र में ही देश को समर्पित के दिया। वे नेता सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व वाली आजाद हिंद फौज में आजादी की लड़ाई के लिए शामिल हो गए।
हेमलता बिष्ट
Sandhya Halchal News